चलो कुछ बातें करते है..

हम जो कहते हैं, क्या लोग वही सुनते हैं?

दो लोगों के बीच जब भी बातचीत होती है तब संचार अक्सर भ्रमित करने वाला हो जाता है, और ये ऐसे ही नहीं होता इसके पीछे भी कुछ स्वाभाविक कारण है।  ज्यादातर समय, हमारे द्वारा बोले गए शब्दों का सही मतलब नहीं निकल पाता है जिस वजह से सुनने वाले तक हम अपनी बाते और उसके पीछे का मकसद पहुचा ही नहीं पाते। और ऐसा इसलिए होता है, क्यु कि हम उस समय मे सही शब्दों के चयन नहीं कर पाते जिसके वजह से हम जो समझाना चाहते है या हमारी जो मंशा होती है वो अस्पष्ट करने मे हम सक्षम नहीं हो पाते। जिसके कारण हमारे शब्दों का कम प्रभाव पड़ता है।  इसलिए, आप जो कहते हैं वह अक्सर वह नहीं होता जो दूसरा व्यक्ति सुनता है।  संचार के पीछे की ऊर्जा हमारे इरादे से निर्धारित होती है।  भागीदारों के बीच अधिकांश संचार में, दो अलग-अलग इरादे होते हैं जो किसी भी संचार को प्रेरित कर सकते हैं: पहला इरादा आपका, जो आप समझाना चाहते है और दूसरा इरादा सामने वाले का, जो आप के शब्दों का मतलब निकालता है।..

अगली बार बात करते समय अपने शब्दों को बहुत सावधानी पूर्वक चुने.. सही और अस्पष्ट शब्दों के इस्तमाल से आप अपने संचार को काफ़ी साकारात्मक और ऊर्जावान बना सकते है..

मैं आशा करती हू आप मेरे इस लेख को पसंद करेंगे धन्यवाद.. @letstalkwithvimee

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